बिहार में छात्र आंदोलनों पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा- कन्हैया कुमार

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा बिहार में छात्र आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए गठित फैक्ट-फाइंडिंग टीम की प्रारंभिक रिपोर्ट लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश करती है।

बिहार में छात्र आंदोलनों पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा- कन्हैया कुमार
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पटना, 4 अगस्त 2026 एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार ने मंगलवार को बिहार प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाक़त आश्रम में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा बिहार में छात्र आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए गठित फैक्ट-फाइंडिंग टीम की प्रारंभिक रिपोर्ट लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न जिलों में छात्रों के शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलनों को कुचलने के लिए पुलिस ने कानून और पुलिस मैनुअल की खुलेआम अनदेखी की।

कन्हैया कुमार ने बताया कि फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने पटना, सिवान, जहानाबाद,  भागलपुर, दरभंगा सहित कई जिलों का दौरा कर पीड़ित छात्रों, उनके परिजनों, प्रत्यक्षदर्शियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत की। प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आया है कि कई स्थानों पर छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस, गोलीबारी और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की गईं। रिपोर्ट के अनुसार बल प्रयोग के लिए आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किस मजिस्ट्रेट अथवा अधिकारी के आदेश पर कार्रवाई की गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि सिवान में छात्रों पर गोली चलाने के दौरान अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया तथा प्रदर्शन नियंत्रण में अनुचित हथियारों के इस्तेमाल के आरोप भी सामने आए हैं। कई घायल छात्रों के मेडिकल परीक्षण, गिरफ्तारी मेमो तथा अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के पालन के पर्याप्त साक्ष्य भी उपलब्ध नहीं कराए गए।

कन्हैया कुमार ने कहा कि फैक्ट-फाइंडिंग टीम को ऐसे कई मामले मिले हैं, जिनमें छात्रों, नाबालिगों तथा छात्राओं को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया, उनके परिजनों को समय पर सूचना नहीं दी गई और कई मामलों में निर्धारित समय सीमा के भीतर न्यायालय में भी पेश नहीं किया गया। रिपोर्ट के अनुसार कई ऐसे छात्रों को भी गिरफ्तार किया गया जिनका प्रदर्शन से प्रत्यक्ष संबंध नहीं था और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा सभी मामलों को वापस लेने का दावा वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाता, क्योंकि कई जिलों में अब भी प्राथमिकी दर्ज हैं और अनेक छात्रों के विरुद्ध कार्रवाई जारी है। फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलनों की कवरेज करने वाले पत्रकारों, यूट्यूबरों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को भी पुलिस द्वारा चिन्हित कर प्रताड़ित किया गया तथा कुछ मामलों में गिरफ्तारियां भी की गईं।

कन्हैया कुमार ने बिहार सरकार से मांग की कि छात्र आंदोलनों के दौरान हुई प्रत्येक पुलिस कार्रवाई की न्यायिक एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, सभी लंबित मामलों की जानकारी सार्वजनिक की जाए तथा निर्दोष छात्रों और अन्य लोगों के विरुद्ध दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं। उन्होंने कहा कि बिहार लोकतंत्र की भूमि है और इसे पुलिसिया शासन या लाठीतंत्र में बदलने का प्रयास किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। एनबीसी 24 के लिए पटना से कुमार गौतम की रिपोर्ट।